
मैं जब मसूरी घूमने गयी तो मेरी इच्छा सुंदर पहाड, झरने और जंगल देखने की तो ठीक हीसाथ ही मेरा मेन था मैं थोडे दिन पहले पढी द ब्लू अम्ब्रेला ( जिस पर बाद में फिल्म भी बनी ) के लेखक रस्किन बांड से मिलूं.बच्चों के चहेते रस्किन बांड यूँ तो अंग्रेज हैं पर इनका जन्म हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुआ था और पिछले कई दशक से मसूरी उनका घर है. मैंने पापा से कहा चलो पापा पहले उनसे मिल लेते हैं और पापा भी मान गये. हमें पता था कि वे लंदौर में रहते हैं पर सही पता नहीं था. पर वे मसूरी के सबसे प्रसिद्ध नागरिक हैं सो आसनी से उनका घर मिल गया. मैंने डरते डरते घंटी बजाई, पता नहीं वे मिलेंगे कि नहीं. एक मैडम ने दरवाजा खोला, बताने पर कहा, क्या आपके पास एपांटमेंट है. हमने कहा, नहीं. उन्होंने कहा, उनकी तबियत ठीक नहीं और वे अंदर चली गयीं. हमें लगा कि मिलना होगा नहीं. पर मेरी खुशी का ठिकाना न रहा जब मैंने देखा, उधर से रस्किन बांड चले आ रहे हैं. मैंने, नमस्ते की. उन्होंने मुझसे प्यार से बातें की. मैंने अपनी आटोग्राफ बुक सामने की तो उन्होंने अपने हस्ताक्षर तो किये ही साथ में एक संदेश भी लिख दिया. इतने में पापा ने फोटो खींच ली और हम थैंक्स कह कर लौट आये.